बीजेपी के फैसले ने बटोरी सुर्खियां: उम्मदवारो की पहली लिस्ट में ये भी थे शामिल
सिराथू सीट चुनावी मैदान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर (शहरी) और उनके डिप्टी केशव प्रसाद मौर्य को उतारने के बीजेपी के फैसले ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। 105 उम्मदवारो की पहली लिस्ट में रानी मौर्य, जयवीर सिंह, सहेंदर सिंह रमाला भी थे जिन्होंने चुनावी विश्लेषकों और सियासी समझ रखने वालो का ध्यान खींचा।
केशव मौर्य जाटव हैं, यह दलित की उप-जाति है जिससे बसपा प्रमुख मायावती आती हैं। योगी आदित्यनाथ के लिए रास्ता बनाने के लिए बीएसपी के दिग्गज रहे जयवीर सिंह ने यूपी विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया था। रमाला एक जाट हैं, जिन्होंने 2018 में भाजपा में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय लोक दल(रालोद) से इस्तीफा दे दिया।
इसे बीजेपी के दलित जाट-ठाकुर सामाजिक गठबंधन के तौर पर विश्लेषक देख रहे हैं। चुनावी रूप से पश्चिमी यूपी में ये महत्वपूर्ण है। यहां बीजेपी को सपा और रालोद के मुखर गठबंधन का सामना करना है। मुस्लिम समुदाय से समर्थन सपा को मिलता दिख रहा, तो वहीं रालोद का जाट मतदाताओं के बीच एक मजबूत नींव है।
आगरा (ग्रामीण) की आरक्षित सीट से विधान सभा चुनाव बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बेबी रानी मौर्य लड़ रही है। वह धोबी उप-जाति से आने वाली भाजपा विधायक हेमलता दिवाकर कुशवाहा का स्थान लेंगी। 2017 में बसपा के कालीचरण सुमन को लगभग 65,000 मतों के अंतर से हेमलता ने हराया और 52% से अधिक मतों पर कब्जा भी किया। बताया जा रहा है आगरा से मौर्य को मैदान में उतारकर बीजेपी मायावती की बसपा के पीछे खड़े उन दलित मतदाताओं को अपने पाले में लाना चाहती है।
भाजपा के मौजूदा विधायक दलवीर सिंह की जगह भी अलीगढ़ की बरौली विधानसभा सीट से मैदान में उतरे जयवीर सिंह ने ली। योगी के लिए 2017 में सीट खाली करने के तुरंत बाद 2018 में जयवीर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुने गए।
2017 के विधानसभा चुनाव में जीतने वाले बागपत जिले के छपरौली से मौजूदा विधायक सहेंद्र सिंह रमाला एकमात्र रालोद उम्मीदवार थे।
हेमलता बिष्ट
Sandhya Halchal News